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क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट - एक परिचय

नैदानिक प्रतिष्ठान पंजीयन और विनियमन अधिनियम -2010 (Clinical Establishment Registra-tion & Regulation Act-2010) भारत में सभी प्रकार के अस्पतालों, प्रयोगशालाओं, क्लिनिक, नर्सिंग होम और चिकित्सा संस्थानों को न्यूनतम मानक निर्धारित करने, नैदानिक सुविधा देने व सामान्य बीमारियों के उपचार मानक हेतु बनाया गया केंद्र सरकार का अधिनियम है जिसे अनेक राज्यों ने अस्पतालों की न्यूनतम गुणवत्ता, मानक और रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने हेतु लागू किया गया है। इस अधिनियम के अनुसार किसी भी राज्य में नैदानिक प्रतिष्ठान, क्लिनिक व अस्पताल चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि वह इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विधिवत पंजीकृत ना हो जाए। साथ ही चिकित्सक / चिकित्सालय द्वारा उपचारित मरीजों के चिकित्सा अभिलेख और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी व आंकड़े संग्रह व प्रस्तुत करना भी अनिवार्य है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए न्यूनतम मानकों को विनियमित व निर्धारित करना है। इस अधिनियम के अंतर्गत यदि बिना रजिस्ट्रेशन के देश में कोई भी नैदानिक प्रतिष्ठान चलाया जाएगा तो उसे "50,000/- जुर्माना देना होगा। इस अधिनियम के अनुसार, सैन्य बलों के अस्पतालों को छोड़कर, सभी ऐलोपैथी व आयुष अस्पतालों (सरकारी व निजी) के लिए रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है। परंतु इस कानून को सभी राज्य सरकारों ने लागू नहीं किया है। वर्ष 2021 में गुजरात सरकार ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट बनाया और मार्च 2024 तक इस एक्ट के अंतर्गत गुजरात के सभी ऐलोपैथी व आयुष अस्पतालों को रजिस्ट्रेशन करने की अंतिम तिथि दी गई थी जिसमें अस्पतालों में प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सकों के लिए भी संबंधित काउंसिल से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य था। इस कारण से गुजरात में अनेक वर्षों से चला रहे योग नेचुरोपैथी हॉस्पिटल को बंद करने की समस्या आ खड़ी हुई थी। गांधी जी की जन्मभूमि गुजरात में योग नेचुरोपैथी चिकित्सकों के लिए वर्तमान में सरकार का न कोई अधिनियम है और उनके रजिस्ट्रेशन के लिए न कोई परिषद् है और न ही कोई योग नेचुरोपैथी कॉलेज या अस्पताल। तकनीकी रूप से इसका यह अर्थ है कि गुजरात में कोई भी व्यक्ति योग नेचुरोपैथी की न तो पढ़ाई कर सकता है न ही चिकित्सा सेवायें दे सकता है। लेकिन सरकार में बैठे सभी मंत्री, अधिकारी और राज्यपाल योग नेचुरोपैथी अस्पताल में अनेक वर्षों से उपचार लेकर आरोग्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में गुजरात सरकार ने केवल एक प्राइवेट योग नेचुरोपैथी कॉलेज को चलाने की मान्यता दी है। इस महत्वपूर्ण व गंभीर विषय को लेकर पहली बार गुजरात के योग प्राकृतिक चिकित्सक व INO के पदाधिकारियों ने संगठित होकर 21 व 22 दिसंबर 2024 को 'दर्शन विश्वविद्यालय' में आयोजित योग नेचुरोपैथी सम्मेलन में मेरे साथ विस्तृत चर्चा करके निर्णय लिया था कि इस समस्या का समाधान मार्च 2025 से पूर्व करना होगा और यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गुजरात के योग नेचुरोपैथी अस्पताल बंद हो जाएंगे। यह विदित है कि एक बार सभी विधायकों के द्वारा विधानसभा में अधिनियम बनने के बाद उसमें संशोधन करना या उसे वापस लेना बहुत जटिल काम होता है। लेकिन कहते हैं कि कुछ भी असंभव नहीं है (Nothing is Impossible) इस विषय पर गुजरात INO के अध्यक्ष श्री मुकेश भाई शाह के मार्गदर्शन में गुजरात के प्रमुख योग नेचुरोपैथी चिकित्सकों की बैठक कर इस समस्या के समाधान हेतु गुजरात क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से योग नेचुरोपैथी को छूट (Exemption) दिलाने की योजना बनाई। इसके लिए INO के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनंत बिरादार के नेतृत्व में जनवरी व फरवरी तक गुजरात के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, गृहमंत्री व आयुक्त - आयुष से परामर्श अनुसार गुजरात INO टीम ने 24 x 7 दिन काम किया और मार्च 2025 के पूर्व इस एक्ट में से योग नेचरोपैथी को हटा (Exempt) दिया गया और Impossible को possible करके दिखाया। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए गुजरात के महामहिम राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व आयुक्त आयुष के हम आभारी हैं कि उनके मार्गदर्शन व योग नेचुरोपैथी के लिए सकारात्मक सोच से ही यह असंभव काम संभव हो सका। इसके लिए योग नेचुरोपैथी से जुड़े विशेषज्ञ व हित धारक इस परोपकारी कार्य के लिए गुजरात सरकार के सदैव कृतज्ञ रहेंगे। साथ ही इस विषय में जुड़े गुजरात INO के सभी पदाधिकारियों का भी हार्दिक अभिनंदन।

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